सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लोन डिफॉल्ट होने पर भी बल,
चोरी-छिपे या मनमाने तरीके से वाहन जब्त करना गैरकानूनी
नई दिल्ली।
अगर आपने कर्ज (लोन) पर बाइक, कार या कोई अन्य वाहन खरीदा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि कर्ज से खरीदे गए वाहन को जबरन नहीं छीना जा सकता।
कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को निर्देश दिया है कि वह गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए जारी अपने दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू कराए।
कोर्ट ने क्या कहा? - 5 पॉइंट में समझिए
1. कानूनी प्रक्रिया जरूरी: कर्ज लेकर खरीदा गया वाहन सिर्फ और सिर्फ कानूनी तरीके से ही जब्त (जप्त) किया जा सकता है।
2. जबरन वसूली पर रोक: कर्जदार अगर किस्त चुकाने में चूक भी जाता है, तब भी वाहन जब्त करने के लिए बल प्रयोग, चोरी-छिपे कार्रवाई या कोई भी मनमाना तरीका नहीं अपनाया जा सकता। अक्सर देखा जाता है कि रिकवरी एजेंट बीच रास्ते में गाड़ी रोककर चाबी निकाल लेते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत बताया है।
3. RBI के नियम सिर्फ कागजों पर: शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि NBFC और बैंकों के लिए RBI द्वारा जारी दिशा-निर्देश और मुख्य परिपत्र अब तक केवल कागजों पर रहे हैं। उन्हें जमीनी स्तर पर लागू कराने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।
4. RBI को सख्ती के निर्देश: इसीलिए कोर्ट ने RBI को कहा है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोई भी बैंक या फाइनेंस कंपनी बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए वाहन न छीने।
5. आम आदमी को क्या फायदा?
इस फैसले के बाद अगर कोई फाइनेंस कंपनी या उसके रिकवरी एजेंट आपके साथ जबरदस्ती करते हैं, तो आप उसकी शिकायत RBI, बैंक के नोडल अधिकारी और पुलिस में कर सकते हैं। आपके पास कोर्ट जाने का पूरा अधिकार है।
पृष्ठभूमि: RBI के नियमों के मुताबिक, वाहन जब्त करने से पहले कर्जदार को उचित नोटिस देना, डिफॉल्ट की जानकारी देना और उसे अपनी बात रखने का मौका देना अनिवार्य है।
यह फैसला आम कर्जदारों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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