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| फोटो: जलालाबाद शमशाबाद स्टेट हाइवे पर भरा पानी |
और बढ़ा रामगंगा का जलस्तर तो अल्हागंज क्षेत्र की बढ़ेगी मुसीबत
गंगा रामगंगा की बाढ़ से खेत डूबे, हाईवे पर बह रहा पानी
जल निगम की रिपोर्ट: रामगंगा ने पार किया खतरे का निशान
उत्तर प्रदेश/शाहजहाँपुर
जनपद में नदियों का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। शारदा नहर खण्ड के बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा बुधवार शाम 6 बजे जारी की गई आधिकारिक रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता पर मुहर लगा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक रामगंगा नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी है, जबकि गंगा और गर्रा में भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा असर ब्लाक मिर्जापुर समेत खादर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में देखने को मिल रहा है, जहां जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष, शारदा नहर खण्ड के प्रभारी अधिकारी द्वारा जारी रिपोर्ट (गेज मीटर में) के अनुसार -
1. रामगंगा नदी (डबरी घाट) - सबसे ज्यादा खतरनाक: अधिकतम स्तर 139.695 मी०, खतरे का निशान 137.30 मी०। आज सायं 6 बजे जलस्तर 137.59 मी० दर्ज किया गया, जो खतरे से +0.29 मीटर ऊपर है। सुबह 8 बजे से 0.01 मीटर की बढ़ोत्तरी हुई है।
2. गंगा नदी (भैंसार ड्राई घाट तटबंध): अधिकतम 144.10 मी०, खतरा 143.65 मी०। वर्तमान स्तर 143.47 मी०, जो खतरे से 0.18 मीटर नीचे है, लेकिन सुबह से 0.02 मीटर बढ़ चुकी है।
3. गर्रा नदी (अजीजगंज पुल): अधिकतम 149.80 मी०, खतरा 148.80 मी०। वर्तमान स्तर 148.00 मी०, खतरे से 0.80 मीटर नीचे, सुबह से 0.05 मीटर की बढ़त के साथ।
4. खन्नौत नदी (लोधीपुर पुल): अधिकतम 146.75 मी०, खतरा 145.75 मी०। वर्तमान स्तर 145.55 मी०, खतरे से 0.20 मीटर नीचे, सुबह से स्थिर।
डिस्चार्ज की स्थिति: दूनी बैराज से गर्रा नदी में 9525 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। कटना नदी में 5000 क्यूसेक पानी पास हो रहा है जो शाहजहाँपुर से पहले गर्रा में मिल जाती है। जबकि खखरा नदी में फिलहाल शून्य क्यूसेक है।
ग्राउंड जीरो पर हाहाकार: खेत जलमग्न, बैलगाड़ी और मोटरबोट बनी सहारा
इधर आधिकारिक आंकड़ों के बीच जमीनी हकीकत बेहद खराब है। गंगा और रामगंगा के उफान से मिर्जापुर ब्लाक क्षेत्र के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
बाढ़ से बेहाल ग्रामीण: फसलें बर्बाद होने की कगार पर - खादर क्षेत्र समेत कई गांवों में खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं। किसानों के सामने फसल बर्बाद होने और भारी आर्थिक नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।
स्कूल जाने को मजबूर छात्र-छात्राएं: रामगंगा के बढ़े जलस्तर का सबसे दर्दनाक नजारा सादिकपुर में है। यहां उच्च प्राथमिक विद्यालय और कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के सामने पुलिया के ऊपर से बाढ़ का पानी बह रहा है। छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से गुजरकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, जिससे अभिभावकों में भारी चिंता है।
रास्ते कटे, सड़कें धंसी: गंगा की बाढ़ से नगला बसोला समेत दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला मार्ग स्टेट हाईवे से पानी गुजरने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। तेज बहाव में इस मार्ग से निकलना जोखिम भरा है। वहीं पिछले कई दिनों से जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाईवे पर भी बाढ़ का पानी बह रहा है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी हो रही है। कई संपर्क मार्ग जलमग्न होने से ग्रामीणों को जरूरी सामान के लिए बैलगाड़ी और मोटरबोट का सहारा लेना पड़ रहा है।
लगातार बढ़ता जलस्तर, जलमग्न खेत और टूटे संपर्क मार्ग अब प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बन गए हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने निगरानी बढ़ा दी है, लेकिन तटवर्ती गांवों में दहशत का माहौल है।
और बढ़ा रामगंगा का जलस्तर तो बढ़ सकती है अल्हागंज क्षेत्र के ग्रामीणों के मुश्किलें
अल्हागंज क्षेत्र में रामगंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर ग्रामीणों में चिंता की लकीरें बढ़ने लगी है। तीन दिन से जिस तरह से रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है अगर उसी तरह आगे भी बढ़ोत्तरी हुई तो रामगंगा का जलस्तर नेशनल हाईवे 730 C को पार कर जाएगा। नेशनल हाईवे 730 सी पर बनी पुलियां किसानों के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। रामगंगा नदी का जलस्तर वैसे ही दो दिन से खतरे के निशान से 29 सेंटीमीटर वह रहा है अगर 10/15 सेंटीमैटर और बढ़ोत्तरी होती है तो नेशनल हाईवे 730 सी के पूर्व साइड में स्थित हजारों एकड़ किसानों की फसलें जलमग्न हो जाएगी। इस दौरान 30 से 40 गांव जिसमें 50 हजार लोगों को बढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। बढ़ते जलस्तर को लेकर किसानों को चिंता सताने लगी है।


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