उत्तर प्रदेश/शाहजहांपुर।
शिक्षक केवल विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की नई पीढ़ी को गढ़ने वाला शिल्पकार है। ऐसे में उसके कार्यों का मूल्यांकन भय और उत्पीड़न के माहौल में नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और सुधारात्मक दृष्टिकोण के साथ होना चाहिए। शिक्षकों के सम्मान और उनके अधिकारों के लिए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ा है।
यह विचार उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की शिक्षक भवन में आयोजित आवश्यक बैठक में संघ के जिला अध्यक्ष मुनीश मिश्र ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों का निरीक्षण शिक्षकों को टारगेट बनाकर केवल कमियां खोजने की मानसिकता से नहीं होना चाहिए। निरीक्षण का उद्देश्य विद्यालयों में सुधार, शिक्षकों को मार्गदर्शन और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरणा देना होना चाहिए।
जिला अध्यक्ष मुनीश मिश्र ने कहा कि वर्तमान सरकार परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प कराकर उनमें प्राइवेट विद्यालयों की तर्ज पर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। शिक्षक भी पूरी निष्ठा और मेहनत से बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे हैं। ऐसे में यदि निरीक्षणकर्ता विद्यालय की समस्याओं का समाधान करने और अच्छे कार्यों की सराहना करने के बजाय केवल कमियां खोजकर शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न करेंगे तो यह किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कमियां हर व्यक्ति और हर कार्यालय में होती हैं, लेकिन शिक्षक को डराकर नहीं बल्कि उसका हाथ पकड़कर आगे बढ़ाने की जरूरत है। यदि संघ को विवश किया गया तो कमियां सार्वजनिक करने से भी शिक्षक संघ पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षा जगत में वर्षों तक अपनी सेवाएं देकर सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों के सम्मान में जनपद मुख्यालय पर अतिशीघ्र सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों ने अपना जीवन बच्चों के भविष्य को संवारने में लगाया है, इसलिए उनका सम्मान करना समाज और संगठन दोनों का दायित्व है।
संघ के जिला मंत्री देवेश बाजपेई ने कहा कि वर्तमान समय में बरसात का मौसम है और कांवड़ यात्रा सहित अनेक व्यवहारिक परिस्थितियां बनी रहती हैं। ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों का निरीक्षण किया जाना चाहिए। यदि कोई शिक्षक विशेष परिस्थिति में पांच-दस मिनट विलंब से विद्यालय पहुंचता है तो उसे उत्पीड़न का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को उपस्थिति के लिए जियो टैगिंग फोटो भेजने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। व्यवहारिक कठिनाइयों को देखते हुए ऑनलाइन उपस्थिति का विषय शासन स्तर पर विचाराधीन है, इसलिए शिक्षकों की समस्याओं और परिस्थितियों को समझना आवश्यक है।

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