संवैधानिक पद पर बैठकर जातिवाद का जहर घोलते तिलहर के एडीओ पंचायत, मर्यादा भूले
उत्तर प्रदेश
मामला यूपी के शाहजहाँपुर है जहां सरकारी सेवा की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर सोशल मीडिया को अपनी कुंठा निकालने का अखाड़ा बनाना आजकल कुछ अधिकारियों और लोगों की आदत बन चुकी है। शाहजहाँपुर जनपद के विकास खंड तिलहर में एडीओ पंचायत के पद पर कार्यरत वीर सेन ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए न केवल प्रशासनिक अनुशासन की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि समाज में जातिगत टिप्पणी करके शांति भंग करने और सामुदायिक रंग देने की कोशिश करते हुए अव्यवस्था फैलाने की भी शर्मनाक चेष्टा की है। एडीओ जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहने के बावजूद उन्होंने देश के सर्वोपरि ग्रंथ भारत का संविधान, उसके निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, विधिक सलाहकार बी. एन. राव और साथ ही ब्राह्मण समाज को लेकर जिन अमर्यादित व अशोभनीय शब्दों का प्रयोग किया है, वह एक लोक सेवक की निम्न बौद्धिक स्तर को उजागर करता है।
यह देखना बेहद दिलचस्प और चिंताजनक है कि जिस संविधान की बदौलत इस संवैधानिक पर पर मलाई काट रहे हैं उसी संवैधानिक पर का दुरुपयोग करने की भी कोशिश की है। भारत में सबसे ज़्यादा जिम्मेदारी प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों किभी जिम्मेदारी बताई गई है कि वह सरकारी सेवाओं में रहते हुए केवल एक देश एक संविधान के साथ ऊँच नीच की भावनाओं को अग्रेषित नहीं होने देंगे लेकिन यहां एडियो साहब के ऊपर ऐसा मानसिक संतुलन बिगड़ गया कि वह भारतीय संविधान का सहारा लेकर देश की सनातन धर्म की सबसे अग्रणी जाति जिसे ब्राह्मण कहते हैं उसे ही टारगेट करके सामुदायिक रंग देते हुए सामाजिक शांति व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न करने के लिए फेसबुक पर ब्राह्मणों पर अभद्र टिप्पणी कर रहे हैं।
संवैधानिक पद पर बैठकर ब्राह्मण समाज के प्रति ज़हर घोलने का कार्य कर रहा है। इतिहास की महान विभूतियों को अपनी अज्ञानता के तराजू में तौलने वाले इस भ्रष्ट अधिकारी ने अपनी पोस्ट में जिस तरह ब्राह्मणों को घसीटते हुए ओछे पारिवारिक रिश्तों की उपमा दी है, वह यह साफ झलकाता है कि पद तो इन्हें प्रशासनिक मिल गया, लेकिन सामाजिक संस्कार और मर्यादा की परीक्षा में ये पूरी तरह अनुत्तीर्ण रहे। अभिव्यक्ति की आजादी का ऐसा दुरुपयोग और जातिगत द्वेष फैलाना ही क्या अब एक जिम्मेदार अधिकारी का मुख्य कर्तव्य रह गया है? सरकारी आचरण नियमावली को ठेंगा दिखाकर सरेआम सोशल मीडिया पर जातियों को निशाना बनाना और देश के गौरवशाली इतिहास पर कीचड़ उछालना एक अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है। जब विकास खंड स्तर पर बैठकर समाज को जोड़ने और विकास करने की जिम्मेदारी संभालने वाले जिम्मेदार ही खुद को ट्रोल्स की कतार में खड़ा कर लेंगे, तो समाज में प्रशासनिक निष्पक्षता का क्या संदेश जाएगा? संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक सद्भाव को ठेस पहुँचाने वाली यह टिप्पणी सीधे तौर पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रित करती है। जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों को इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, ताकि सरकारी तंत्र में बैठकर समाज में जातिवाद का जहर घोलने वाले ऐसे तत्वों को यह अहसास हो सके कि कानून और मर्यादा सर्वोपरि हैं।
कार्रवाई से बचने के लिए सोशल मीडिया पर मांगी माफी
शाहजहांपुर के तिलहर में तैनात वीर सेन नाम यवक ने सुबह ब्राह्मणों को लेकर जो सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी उसे शाम होने से पूर्व विवाद बढ़ता देख डिलीट कर दिया । जानकारी के मुताबिक वीर सेन ने कानूनी कार्यवाही से बचने के साथ ब्राह्मणों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे को लेकर माफी मांगते हुए पोस्ट की है।




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