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देश हमारा कहाँ जा रहा अब तो एक हो जाओ तुम..
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झूठे आडंबरों को छोड़कर अब समय आगया जागो तुम ,
देश द्रोहियों के जंजालों में फंसकर
खुदको को मत उल्झाओ तुम।
देश हमारा कहाँ जा रहा अब तो एक हो जाओ तुम....
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हम सब भारत वासी हैं,
आपस की एकता को तोड़कर आखंडता को न अपनाओ तुम।
देश हमारा कहाँ जा रहा अब तो एक हो जाओ तुम......
बेच दिया है जंगल, पर्वत,
पानी भी हमसे छीन लिया,
इन देशद्रोहियों ने निज स्वार्थ के खातिर हमसे हमारा जीवन छीन लिया।
जो रह गयी धरोहर देश की उसको अब बचालो तुम।
देश हमारा कहाँ जा रहा अब तो एक हो जाओ तुम.....
एक दूसरे का खून बहाकर कुछ ठीक नहीं कर पाओगे,
इन देश के गदारों के हाथों एक दिन सब मारे जाओगे।
सब मिल अब एक नई क्रांति लाओ तुम।
देश हमारा कहाँ जा रहा अब तो एक हो जाओ तुम....
भगत सिंह, अब्दुल कलाम, सुभाष चन्द्र बोस, भीमराव आम्बेडकर, चंद्र शेखर आज़ाद, मंगल पाण्डेय, को याद करो अब,
कुछ बलिदान हुए देश के खातिर और
देश हित में काम किया ,
इन देश के बलिदानियों का कर्ज़ आज उतारो तुम।
देश हमारा कहाँ जा रहा अब तो एक हो जाओ तुम.....
लेखक ✍️ कवियत्री कंचन मिश्रा (शाहजहाँपुर,उ. प्र.)

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